सेहत

मधुमेह के रोगियों के लिए सुबह का नाश्ता – डॉ. कन्या जैन

मधुमेह रोगी को मधुमेह से बचने के लिए और स्वस्थ बने रहने के लिए सुबह सुबह स्वस्थ नाश्ता करना चाहिए ताकि मधुमेह के मरीज़ का स्वास्थ्य अच्छा बना रहें। स्वस्थ आहार करने से हम दिनभर शारीरिक और मानसिक रूप से सक्रिय रहते हैं। जिससे आप दिनभर उर्जावान बने रहते हैं और कई सारे रोगों से भी बचे रहते हैं। तो आइए जानते हैं मधुमेह रोगी को सुबह सुबह कैसा नाश्ता करना चाहिए…. नाश्ते में ताज़े फल और सब्ज़ियों की सलाद का सेवन करना चाहिए। ये कई सारे मिनरल और एंटीऑक्सीडेन्ट से भरपूर होते हैं। जो आपके शरीर को रोगों से लड़ने की शक्ति प्रदान करते हैं। जिससे आप स्वस्थ बने रहते हैं। ताज़े और मौसमी फलों को सुबह के नाश्ते में ज़रूर शामिल करें। इसके अलावा ताज़े फलों का जूस भी नाश्ते में ले सकते हैं। भोजन में अलसी के बीज या तेल का उपयोग ज़रूर करें क्योंकि यह ओमेगा 3 फैटी एसिड और फ़ाइबर से भरपूर होता है, जो आपके स्वास्थ्य का उचित ख़याल रखता है। उबला हुआ अंडा सुबह के नाश्ते के लिए बहुत अच्छा होता है। यह कई सारे पोषक तत्व से भरपूर होता है। इसीलिए इसका सेवन ज़रूर करें। नाश्ते में साबुत अनाज और अनाज वाली ब्रेड का सेवन करना चाहिए। यह फ़ाइबर से भरपूर होता है जो मधुमेह को कंट्रोल करता है। ओटमील कई सारे पोषक तत्व से भरपूर होता है इसीलिए सुबह सुबह नाश्ते में इसका सेवन ज़रूर करें। इसके अलावा ओट मिल्क का सेवन भी स्वास्थ्य के लिए लाभकारी होता है। –सुबह सुबह नाश्ते में बिना वसा वाला दूध और बिना वसा वाले दही का सेवन करें। चाय या कॉफी में दालचीनी पाउडर डालकर सेवन करें। इस उपाय से मधुमेह रोग कंट्रोल में रहता है। इन सबके अलावा सब्ज़ियों का सूप और ताज़े फलों का रस भी पिए। ये आपके शरीर को एनर्जी प्रदान करते हैं। इनके सेवन से आप मोटापे से भी बचे रहते हैं। मधुमेह रोगी को हेल्दी नाश्ता करना चाहिए। हेल्दी नाश्ता करने से मोटापा नहीं बढ़ता है, तनाव का स्तर कम होता है और आप शारीरिक और मानसिक रूप से सक्रिय रहते हैं। इसके अलावा मधुमेह रोगी को अपने भोजन में हरी सब्ज़ियां, फल और दालों को भी सेवन करना चाहिए। जो आपके शरीर को हेल्‍दी बनाए रखता है और शरीर को एनर्जी भी प्रदान करता है। ।

पानी में हल्दी पाउडर मिलाकर पीने के फ़ायदे – डॉ. आकांक्षा

भारत देश में हल्दी का सबसे ज़्यादा उपयोग भोजन में मसाले के रूप में किया जाता है, जिससे भोजन स्वादिष्ट और रुचिकर बनता है। भोजन में हल्दी का उपयोग करने से पेट की समस्याएं दूर हो जाती हैं। इसके अलावा हल्दी का उपयोग करने से कई तरह की बीमारियों से छुटकारा मिलता है। हल्दी में एंटीऑक्सीडेंट, एंटीबैक्टीरिया और एंटीफंगल तत्व होते हैं जो शरीर को रोगों से लड़ने की शक्ति प्रदान करते हैं। इसके अलावा इसमें प्रोटीन, फ़ाइबर, विटामिन सी, विटामिन के, पोटैशियम, कैल्शियम, कॉपर, आयरन, मैग्नीशियम व ज़िंक जैसे कई पोषक तत्व पाए जाते हैं। जब आप किसी भी रूप में हल्दी का सेवन करते हैं तो हल्दी में मौजूद कई सारे पोषक तत्व भी प्राप्त हो जाते हैं, जिससे आप रोग मुक्त रहते हैं। आयुर्वेद में हल्दी का उपयोग घरेलू उपचार के रूप में किया जाता है। यह एक एंटीसेप्टिक है इसीलिए यह घाव, सूजन या चोट को जल्दी ठीक कर देता है। पानी हमारे शरीर के लिए बहुत ज़रूरी होता है। अगर हल्के गुनगुने पानी में हल्दी पाउडर मिलाकर पिएं तो यह स्वास्थ्य को बहुत अधिक लाभ प्रदान करता है। आइए पानी में हल्दी पाउडर मिलाकर पीने के फ़ायदों के बारे में जानें |

पानी में हल्दी पाउडर डालकर पीने से लाभ

1. दिमाग़ी शक्ति बढ़ाए

सुबह के समय 1 गिलास हल्के गुनगुने पानी में 1/2 चम्मच हल्दी पाउडर मिलाकर पीने से दिमाग़ तेज़ और ऊर्जावान बनता है।

2. रक्त का शोधन करें

यदि आप 1 गिलास हल्के गुनगुने पानी में 1/2 चम्मच हल्दी पाउडर मिलाकर पीते हैं तो इससे ख़ून में होने वाली गंदगी साफ़ होती है। जिससे रक्त का शोधन होता है और आप दिल की व कई अन्य बीमारियों से बचे रहते हैं।

3. लीवर की रक्षा करें

जो व्यक्ति नियमित हल्के गुनगुने पानी में हल्दी पाउडर मिलाकर पीते हैं, वे लीवर की समस्या से बचे रहते हैं क्योंकि हल्दी के पानी में मौजूद तत्व लीवर को संक्रमण से बचाकर लीवर को ठीक रखते हैं।

4. हार्टअटैक या हृदय आघात से बचाए

हार्ट की समस्या से पीड़ित रोगी को नियमित गुनगुने पानी में हल्दी पाउडर डालकर पीना चाहिए क्योंकि हल्दी ख़ून को साफ़ करती है, जिससे आप हार्टअटैक की समस्या से बचे रहते हैं।

5. सौन्दर्य निखारे

हल्दी में मौजूद तत्व रूप सौन्दर्य को निखारकर प्राकृतिक सौंदर्य प्रदान करते है। इसीलिए शादी में दूल्हा और दुल्हन को हल्दी का उबटन लगाया जाता है जिससे उनका प्राकृतिक रूप निखर कर आए। हल्दी एंटीसेप्टिक है जो त्वचा को कील मुहांसे व बैक्टीरिया से भी बचाती है।

6. त्वचा को जवां बनाने के लिए

त्वचा को जवां बनाने के लिए और बढ़ती उम्र को छुपाने के लिए हल्दी पाउडर के पानी में शहद और नींबू मिलाकर सेवन करें। यह घरेलू नुस्ख़ा शरीर के अंदर जमे हुए विषैले पदार्थों को बाहर निकाल देता है जिससे शरीर पर बढ़ती हुई उम्र का असर नहीं पड़ता है और आपकी त्वचा जवां नज़र आती हैं।

7. दर्द दूर करें

हल्दी दर्द निवारक है। कभी भी चोट या घाव के कारण या सूजन हो जाने के कारण दर्द ज़्यादा परेशान करें, तो उस दर्द को दूर करने के लिए हल्के गुनगुने पानी में हल्दी पाउडर मिलाकर सेवन करें। यह सूजन और उसके दर्द को ठीक करने का एक घरेलू उपाय है।

8. कैंसर से बचाए

हल्दी एक एंटीसेप्टिक, एंटी बैक्टीरियल तत्व है जो शरीर को कैंसर जैसे भयावह रोगों से लड़ने की शक्ति प्रदान करता है। यदि आप सप्ताह में तीन दिन गुनगुने पानी में हल्दी पाउडर मिलाकर पियेंगे तो आप भविष्य में कैंसर जैसे भयावह रोग से हमेशा बचे रहेंगे।

9. मुँह के छाले ठीक करें

मुंह में छाले होने पर गुनगुने पानी में हल्दी पाउडर मिलाकर कुल्ला करें या हल्का गर्म हल्दी पाउडर छालों पर लगाए। इससे मुंह के छाले ठीक हो जाते है। ।

बाबची के फायदे और नुकसान – डॉ. आकांक्षा

बाबची एक औषधि है जिसे बावची , बकुची या बाकुची के नाम से भी जाना जाता है। इसका बीज काले रंग का होता है। बाकुची के बीजों से तेल प्राप्त किया जाता है, जिसके तेल का उपयोग औषधीय रूप में भी किया जाता है। यह स्वाद में थोड़ा मीठा, कड़वा और तीखा होता है। बाबची का बीज भूख बढ़ाने में मदद करता है। यह सफेद दाग, चर्म रोग, खुजली और कुष्ठ रोग की समस्या को दूर करने में मदद करता है। यह दांत दर्द को दूर करने, दांत के कीड़े व पेट के कीड़ों को मारने में सक्षम है। इसके बीज में ऐसा यौगिक पाया जाता है जो यौन रोग को दूर करने में सक्षम है। ऐसे कई बाबची के फायदे आज हम आपको अवगत कराने जा रहे हैं…

1. सफेद दाग से छुटकारा दिलाएं

6 चम्मच बाबची के बीज में 6 चम्मच तिल मिलाकर पीसकर चूर्ण बना ले। फिर एक साल तक सुबह शाम एक चम्मच चूर्ण को ठंडे पानी के साथ सेवन करे। इसके अलावा बाबची के पौधे को रात में एक बर्तन में पानी में भिगों कर रख दें और सुबह इस पानी को पिए। इस उपचार से भी सफेद दाग धीरे धीरे चला जाता है।

2. अकूते के फोड़े

अकूते के फोड़े होने पर 50 ग्राम बाबची के चूर्ण को सरसों के तेल में मिलाकर फोड़े पर कुछ दिन तक लगाए इससे फोड़े नष्ट हो जाएंगे।

3. खांसी को दूर भगाए

अगर आप खांसी से परेशान है तो इस घरेलू उपचार को अपनाए। 1 ग्राम बावची के बीजों को पीसकर चूर्ण बना लें। फिर एक चुटकी चूर्ण में थोड़ा अदरक का रस मिलाकर दिन में 3 से 4 बार सेवन करे। इससे खांसी में आराम मिलता है।

4. यौन रोग

बाबची का फल यौन रोग को दूर करने में सहायक है। अतः यौन रोग की समस्या से ग्रसित व्यक्ति बाबची के फल का सेवन करें।

5. पीलिया

पीलिया या जवाइंडिस हो जाने पर रोजाना सुबह शाम 10 मिलीलीटर पुनर्ववा के रस में 1/2 ग्राम पिसी हुई बाबची के बीजों का चूर्ण मिलाकर सेवन करे। इससे पीलिया रोग में लाभ प्राप्त होता है।

6. बवासीर

अगर आप बवासीर रोग से परेशान है तो 5 ग्राम हरड़, 5 ग्राम सौंठ और 2 ग्राम बाबची के बीज को मिलाकर बारीक़ चूर्ण बना लें। फिर सुबह शाम 1/2 चम्मच चूर्ण गुड़ के साथ सेवन करे। इससे बवासीर रोग में आराम मिलता है।

7. बांझपन को दूर करने के लिए

मासिक-धर्म से शुद्ध होने के बाद बावची के बीजों को तेल में पीसकर योनि में रखने से गर्भधारण करने की क्षमता हो जाती है

8. कुष्ठ रोग या कोढ़ रोग या चर्म रोग

थोड़े से बताशे में 5 बूंद बाबची का तेल डालकर कुछ दिनों तक खाने से कुष्ठ रोग या कोढ़ रोग या चर्म रोग में आराम मिलता है। इसके अलावा बाबची के चूर्ण का काढ़ा बनाकर पीने से भी आरम मिलता है।

9. कृमि नाशक

बाबची के बीज में कृमिनाशक गुण विद्यमान है इसीलिए पेट में कीड़े होने पर रोजाना 1/4 चम्मच बाबची के चूर्ण का सेवन करे। इससे पेट के कीड़े नष्ट हो जाएंगे।

10. दांतों में कीड़े होने पर

बाबची या बाकुची की जड़ को पीस लें। फिर इसमें थोड़ी सी भुनी हुई फिटकरी मिला लें। फिर इस मिश्रण से सुबह शाम मंजन करे। इस मंजन को नियमित करने से दांत के कीड़े नष्ट हो जाते हैं और दांत का दर्द भी दूर हो जाता है। इसके नियमित उपयोग से मसूड़ों की सूजन व दांतो का पीलापन भी दूर हो जाता है। ।

बाबची के नुकसान

बाबची या बाकुची का अधिक मात्रा में सेवन सेहत को नुकसान पहुँचा सकता है। इसका अधिक मात्रा में सेवन करने से सिर दर्द, उल्टी, चक्कर आना, दस्त आना या खुजली आदि की समस्या भी हो सकती है इसीलिए इसका अधिक मात्रा में सेवन न करें।

लाल टमाटर के औषधीय गुण

जिस लाल टमाटर को हम सब्ज़ी के रूप में प्रयोग करते हैं, यह एक अमृत के समान फल है ऐसा वैसा फल नहीं, बल्कि सेब के टककर का फल है। जितने गुण एक सेब में होते हैं उतने ही गुण एक टमाटर में भी होते हैं। टमाटर की एक ख़ूबी यह है कि इसके विटामिंस गरम करने पर भी नष्ट नहीं होते हैं। जब भी आप टमाटर ख़रीदने जाएँ, तो लाल टमाटर ही चुनें क्योंकि इनमें बीटा कैरोटिन व लाइकोपीन की मात्रा ज़्यादा होती है। खट्टा-मीठा टमाटर जितना खाने के स्वाद को बढ़ाता है उतना अधिक लाभ सलाद के रूप के रूप में भी देता है। वैसे इसका सेवन सलाद और सूप के रूप में भी कर सकते है।

लाल टमाटर के गुण सब्ज़ी, कच्चे सलाद या सूप के रूप में टमाटर की कुछ ख़ूबियाँ

6 चम्मच बाबची के बीज में 6 चम्मच तिल मिलाकर पीसकर चूर्ण बना ले। फिर एक साल तक सुबह शाम एक चम्मच चूर्ण को ठंडे पानी के साथ सेवन करे। इसके अलावा बाबची के पौधे को रात में एक बर्तन में पानी में भिगों कर रख दें और सुबह इस पानी को पिए। इस उपचार से भी सफेद दाग धीरे धीरे चला जाता है। वैसे तो लाल टमाटर को विटामिन सी के स्रोत के रूप में आप सभी जानते हैं। टमाटर के सेवन से शरीर में ग्लूकोज़ की मात्रा नियंत्रित होती है जिस कारण इसका नियमित सेवन मधुमेह के रोगियों के लिए बहुत ही लाभकारी है। टमाटर में उपस्थित विटामिन सी आयरन को अब्जॉर्ब / अवशोषित करने मे मदद करता है। लाल टमाटर से पाचन शक्ति भी बढ़ती है और गैस की शिक़ायत भी दूर होती है। कहते हैं कि एक मद्धम आकार के टमाटर में 12 ग्राम कैलोरीज़ होती है। जो लोग अपना वज़न कम करना चाहते हैं उनके लिए ये बहुत उपयोगी है। लाल टमाटर में मौजूद विटामिन सी शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाता है। इसमें पाए जाने वाला विटामिन ए आपकी आँखों की ज्योति बढ़ाता है। इसमें पाया जाने वाका विटामिन के बहुत ही कम फलों और आहार में उपस्थित होता है। इसलिए टमाटर का सेवन और भी लाभकारी होता है। आप अगर टमाटर को आप तक अपने भोजन में इग्नोर करते रहे हैं तो आगे से बिल्कुल ऐसा न करें, इसके गुणों का औषधीय गुणों का लाभ उठायें। ।

तुलसी के फायदे और गुण

तुलसी के फायदे : तुलसी को अंग्रेजी में होली बेसिल कहते हैं, यह लामिअसाए परिवार का ख़ुशबूदार पौधा है। इसका वैज्ञानिक नाम ओसिमुम तेनुइफ़्लोरुम बहुतायत में पाया जाता है। तुलसी का पौधा लगाना शुभ माना जाता है। तुलसी को देवी के रूप में माना जाता है इसलिए यह आज हर घर में पूजी जाती है। तुलसी के पोधे को साधारणतः मार्च से जून तक लगाते हैं। सितम्बर और अक्टूबर में यह पौधा सुगंधित मंजरियों से लद जाता है। जाड़े के दिनों में इसके बीज पक जाते हैं। तुलसी के बीज का उपयोग औषधि बनाने में किया जाता है। तुलसी के गुण अदभुत हैं, इसलिए इसे औषधीय पौधा माना जाता हैं। तुलसी के उपयोग से कई सारे रोगों का शमन हो जाता है। यह पित्तनाशक, कुष्ठ निवारक, पसली में दर्द, कफ, ख़ून में विकार के उपचार में रामबाण की तरह काम करती हैं। दिल के लिए यह अत्यंत उपयोगी औषधि है।

तुलसी के आठ नाम

वृंदा, वृंदावनि, विश्व पूजिता, विश्व पावनी, पुष्पसारा, नन्दिनी, तुलसी और कृष्ण जीवनी है।

तुलसी के फायदे

1. शारीरिक घाव को जल्दी भरती है

तुलसी के औषधीय तत्त्व शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता को बढ़ाते हैं। एक शोध में यह पाया गया कि तुलसी का अर्क या तुलसी के पत्ते खाने से शरीर के घाव जल्दी भरने लगते हैं इसलिए रोज़ाना तुलसी के पत्ते खाएं।

2. बैक्टीरिया से लड़ने की शक्ति देता है

बैक्टीरिया से संबंधित बीमारियों से बचने के लिए रोज़ तुलसी का सेवन करें क्योंकि तुलसी में बैक्टीरिया से लड़ने की अचूक शक्ति है।

3. मधुमेह में रक्त शर्करा को कम करती है

शोध से स्पष्ट हैं कि टाइप 2 मधुमेह वाले रोगियों में तुलसी का अर्क रक्त शर्करा को कम करने में सहायक है। अगर आपको मधुमेह है तो रोज़ाना तुलसी की कुछ पत्तियाँ सुबह ख़ाली पेट खाएं और स्वस्थ रहें।

4. कोलेस्ट्रॉल को कम करती है

एक शोध में यह पाया गया है कि तुलसी में मौजूद कई तत्व लो कोलेस्ट्रॉल LDL को कम करने में सहायक है। तुलसी आपके हृदय और आपको तनाव पूर्ण स्थिति में मानसिक शांति प्रदान करती है।

5. एसिडिटी और पेट के अल्सर से बचाती है

तुलसी आपके पेट में बनने वाली एसिड की मात्रा को संतुलित करता है अगर आप रोज़ाना सुबह ख़ाली पेट कुछ पत्तियाँ तुलसी की चबा कर खाएं तो आपको एसिडिटी की तकलीफ़ से छुटकारा मिल जायेगा और पेट के अल्सर से भी बचाव होगा।

6. जोड़ों के दर्द से राहत दिलाती है

तुलसी जोड़ों के दर्द को कम करने में बहुत ही कारगर है। रोज़ाना 5 तुलसी के पत्ते खाने से जोड़ों की सूजन कम होती है और दर्द में कमी आती है। तुलसी गुणों की खान है, इसके सेवन से आप कई रोगों से मुक्त और स्वस्थ रहेंगे।

7. दिमाग़ को तेज़ बनाती है

तुलसी के अर्क से बनी आयुर्वेदिक दवाई आपके दिमागी ताक़त को बढ़ाती है, यह दिमाग़ से तनाव को कम करती है और मानसिक कार्यक्षमता को बढ़ाती है। ।

सावधानी

तुलसी गुणकारी हैं लेकिन कुछ गम्भीर बीमारियों में इसका सेवन डॉक्टर की सलाह से करें। गर्भावस्था और रक्त स्राव वाली स्थिति में तुलसी का उपयोग नहीं करना चाहिए।

सकारात्मक मानसिक सोच एवं उपाय -जिग्यासा सिंह क्षत्रिय (क्लिनिकल सामाजिक कार्यकर्ता) मुंबई

यह सकारात्मक मानसिक स्वास्थ्य की तीन भाग श्रृंखला है और इसके लिए चिकत्सीय जीवनशैली में परिवर्तन कैसे प्राप्त किया जाए।

भाग 1- सकारात्मक मानसिक स्वास्थ्य

मानसिक स्वास्थ्य महत्वपूर्ण है लेकिन अधिक सकारात्मक मानसिक स्वस्थ है। अभ्यास, आहार, शक्तियों की पहचान, सामाजिक संबंधों को बढ़ाना, समुदाय में भाग लेने और दूसरों की देखभाल करने से इसे प्राप्त करने के कई तरीके हो सकते हैं। यहां हम कुछ चिकत्सीय जीवनशैली में परिवर्तनों पर चर्चा करेंगे (टीएलसी) ऐसे कई बदलाव हैं जो सकारात्मक मानसिक स्वास्थ्य के लिए नेतृत्व कर सकते हैं जैसे हुक और मूल्यों को जोड़ना या दयालुता का यादृच्छिक कार्य। यह सावधानी बरत सकता है, वर्तमान में और यहां और अब में या ताकत और समाधान पर ध्यान केंद्रित कर रहा है। हमारे पास जो कुछ है उसके लिए आभारी होना और उसी आभारी अभ्यास का अभ्यास करना। अब हम सभी इन चीजों से अवगत हैं और चालू और बंद हम भी इसका अभ्यास कर रहे हैं लेकिन यह यहां है कि हमें 21/90 नियम लागू करने की आवश्यकता है। मतलब यह है कि आदत बनाने में 21 दिन लगते हैं और जीवनशैली बनाने के लिए 9 0 दिन लगते हैं। इस प्रकार यह मुद्दा अनुशासन और नियमितता के साथ दिनों की संख्या के लिए कार्य को बनाए रख रहा है। आइए लक्ष्यों और मूल्यों को जोड़ने के साथ शुरू करें, यह चाल समझ रही है कि इनमें से प्रत्येक भाग अलग-अलग कैसे होता है, और फिर उन्हें एक साथ जोड़ने का तरीका ढूंढता है। सही बात? उम्मीद है कि इससे मदद मिलेगी: मूल्य: वे दृष्टि का समर्थन करते हैं, संस्कृति को आकार देते हैं, और प्रतिबंधित करते हैं कि आप क्या महत्व रखते हैं या आपके लिए महत्वपूर्ण हैं। वे आपके सिद्धांत, विश्वास, या मूल्यों के दर्शन हैं। अपने मूल मूल्यों को पांच से परे सीमित करने का प्रयास करें, इसे बनाए रखना थोड़ा मुश्किल हो जाता है। वे हो सकते हैं जो आप महत्वपूर्ण महसूस करते हैं; ऐसा करना या जुनून का प्रदर्शन करना, या उच्च मानकों या सीखने के लिए भूख होना। ये आपके मूल्य हो सकते हैं लेकिन दूसरा आधा लक्ष्य है इसलिए अब लक्ष्यों के बारे में बात करते हैं

लक्ष्य या उद्देश्य:

प्रक्रिया उच्च स्तर के उद्देश्यों को स्थापित करके शुरू होती है। आपके उद्देश्यों को आदर्श रूप से आपके दृष्टि कथन के साथ संरेखित करना चाहिए। जबकि उद्देश्यों को उच्च स्तर है, वे बहुत अस्पष्ट नहीं होना चाहिए। तो उदाहरण के लिए, “कभी भी सबसे अच्छी कार न लें” या “एक अच्छा घर बनाया” न कहें। बेहतर उदाहरण व्यायाम नियमित रूप से 10 किमी प्रति दिन चलते हैं। अब जब हम जानते हैं कि लक्ष्य और मूल्य क्या हैं, हम उन्हें समझने के लिए आवश्यक अंतर को समझते हैं और खुशी और शांति प्राप्त करने के लिए अपने दैनिक जीवन में उनका उपयोग शुरू करते हैं।

दयालुता के ईचित कृत्य:

यह आपके दिल और दिमाग के लिए भोजन की तरह है। “अक्सर हम एक स्पर्श, एक मुस्कुराहट, एक दयालु शब्द, एक सुनना कान, एक ईमानदार तारीफ, या देखभाल करने का सबसे छोटा कार्य की शक्ति को कम से कम समझते हैं, जिनमें से सभी के पास जीवन को बदलने की क्षमता है। “(लियो एफ बुस्काग्लिया) । दयालुता का एक सरल कार्य किसी के डर को कम कर सकता है, किसी के दिल को छू सकता है, और मानवता में किसी के विश्वास को फिर से उत्तेजित कर सकता है। दयालु व्यवहार मानव की सबसे महत्वपूर्ण विशेषताओं में से एक है, हालांकि, जैसे ही हमारे जीवन हमारे समाज के सभी बोझों से घिरे हो जाते हैं, हम जो भी जीते हैं उसका ट्रैक खोना आसान हो जाता है।

सचेतन :

सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि यहां और अब उपस्थित होने पर मनोवैज्ञानिकता है एक सकारात्मक मानसिक स्वास्थ्य प्राप्त करने के लिए हमें एक सावधान जीवन प्राप्त करने की आवश्यकता है। दिमागीपन वर्तमान क्षण में होने वाले अनुभवों पर ध्यान देने की मनोवैज्ञानिक प्रक्रिया है, जो ध्यान के अभ्यास और अन्य प्रशिक्षण के माध्यम से विकसित हो सकती है।

थायराइड की समस्या से है परेशान तो आजमाएं ये घरेलू उपाय

टेंशन, खाने में आयोडीन की कमी या ज्यादा इस्तेमाल, दवाओं के साइड इफेक्ट के अलावा अगर परिवार में किसी को पहले से थायराइड की समस्या है तो भी इसके होने की संभावना ज्यादा रहती है। पुरूषों से ज्यादा महिलाएं इस रोग का शिकार होती हैं। जिसकी वजह से कई तरह की दूसरी बीमारियों के होने का भी खतरा बना रहता है। तो इस बीमारी को आयुर्वेदिक उपायों द्वारा कैसे दूर किया जा सकता है जानेंगे इसके बारे में।

थायराइड के लक्षण और घरेलू उपचार

1.अलसी के 1 चम्मच चूर्ण का प्रयोग थायराइड की बीमारी में कर सकते हैं।
2.थायराइड में हम शिग्रु पत्र, कांचनार, पुनर्नवा के काढ़ों का प्रयोग कर सकते हैं। काढ़ों का प्रयोग करने के लिए हमें 30 से 50 मिली काढ़ा खाली पेट लेना चाहिए।
3.थायराइड में विभीतिका का चूर्ण, अश्वगंधा का चूर्ण और पुश्करबून का चूर्ण भी 3 ग्राम शहद के साथ में या गुनगुने पानी के साथ में दिन में दो बार प्रयोग कर सकते हैं।
4.जलकुंभी, अश्वगंधा या विभीतकी का पेस्ट ग्वाटर के ऊपर लगाएं। पेस्ट को तब तक लगाना है जब तक की सूजन कम न हो जाए। रोग से पीड़ित इन्हीं पौधों के स्वरस का प्रयोग भी कर सकते हैं।
5.थायराइड में धनिये का पानी पी सकते हैं। धनिये के पानी को बनाने के लिए शाम को तांबे के बर्तन में पानी लेकर उसमें 1 से 2 चम्मच धनिये को भिगो दें और सुबह इसे अच्छी तरह से मसल कर छान कर धीरे-धीरे पीने से फायदा होगा।
5.थायराइड की बीमारी में नारियल के तेल का प्रयोग भी कर सकते हैं । 1 से 2 चम्मच नारियल का तेल गुनगुने दूध के साथ में खाली पेट सुबह-शाम लेने से भी थायरॉइड में फायदा होता है।
6.थायराइड में पंचकर्मा की क्रियाएं जिसमें शिरो अभ्यंगम, पाद अभ्यंगम, शिरोधारा, वस्ति, विरेचन, उद्वर्तन और गले के क्षेत्र या थायराइड ग्रंथि पर हम धारा कर सकते हैं। इसमें नस्यम को हम घर पर कर सकते हैं। नस्यम करने के लिए गाय के घी को दो-दो बूंद पिघला के हम नाक में डालने से इस बीमारी में लाभ मिलता है।

थायराइड में क्या करें:

1. थायराइड रोगियों को नियमित रूप से 1 गिलास दूध का सेवन करना चाहिए।
2. थायरॉइड रोगियों को अगर फल खाने हैं तो आम, शहतूत, तरबूज़ और खरबूज का सेवन कर सकते हैं।
3.थायराइड रोगियों को सुबह 10 से 15 मिनट गुनगुनी धूप भी लेनी चाहिए। थायरॉइड में खासौतर से सूर्य नमस्कार, सर्वांगासन, मत्स्यासन, नौकासन का प्रयोग कर सकते हैं और प्रायाणाम में अनुलोम-विलोम और उज्जायी का प्रयोग करें।
4. खाने में दालचीनी, अदरक, लहसुन, सफेद प्याज, थाइम और स्ट्रॉबेरी की पत्तियों का प्रयोग बढ़ा देना चाहिए।
5. थायरॉइड के रोगियों को खाना पकाने के लिए नारियल तेल का प्रयोग करना चाहिए। थायराइड में लघु और सुपाच्य भोजन करना चाहिए, खिचड़ी का प्रयोग कर सकते हैं।

थायराइड में क्या न करें:

1. थायराइड की बीमारी से पीड़ित व्यक्ति को खाने में उन चीजों का परहेज करना चाहिए, जिसे पचाने में परेशानी होती हो।
2. बहुत ज्यादा शारीरिक परिश्रम नहीं करना चाहिए।
3. बासी खाद्य-पदार्थ या जिनमें एडेड शुगर है उनका प्रयोग नहीं करना है।
4. बहुत ज्यादा मिर्च-मसालेदार, तैलीय, खट्टे पदार्थों का प्रयोग नहीं करना है।
5. बहुत ज्यादा ठंडे, खुष्क पदार्थो का सेवन नहीं करना है।
6.थायराइड बीमारी में हमें पालक, शकरकंदी, बंदगोभी, फूलगोभी, मूली, शलजम, मक्का, सोया, रेड मीट, कैफीन और रिफाइंड ऑयल का प्रयोग नहीं करना चाहिए।
7.थायराइड में दही का प्रयोग नहीं करना है।

शहद और दालचीनी के मिश्रण के औषधीय गुण

हम लोग दालचीनी का उपयोग मसालों में सुगन्ध के लिए करते हैं। लेकिन दालचीनी का उपयोग केवल मसालों के लिए बल्कि घरेलू उपचार में भी कर सकते हैं और अगर दालचीनी के चूर्ण में शहद मिलाकर सेवन करें तो यह मिश्रण कई रोगों से बचाकर आपको स्वास्थ्य और हेल्दी रखता है। आज हम आपको शहद और दालचीनी के मिश्रण के औषधीय उपयोग या घरेलू उपचार के बारे में बताने जा रहे हैं। शहद और दालचीनी के मिश्रण के औषधीय उपयोग

मोटापा घटाए

मोटापे के लिए शहद और दालचीनी चूर्ण की चाय का सेवन एक रामबाण उपाय की तरह है। जिसके सेवन से तेजी से मोटापा घटता है। इसके लिए एक चम्मच दालचीनी पाउडर को एक गिलास पानी में डालकर उबाल लें। इसके बाद इसे ठंडा कर लें। फिर इसमें 2 बड़े चम्मच शहद मिलाकर सुबह नाश्ता करने से आधा घंटा पहले और रात को सोने से पहले इसका सेवन करने से मोटापा या अतिरिक्त चर्बी धीरे-धीरे घटने लगती है।

हृदय रोग में लाभप्रद

दालचीनी के पाउडर में शहद मिलाकर इस पेस्ट को रोटी या ब्रेड पर लगाकर खाने से धमनियों में कोलेस्ट्रॉल जमा नहीं होता और आप हार्ट अटैक से बचे रहते हैं। जिन लोगों को एक बार हृदयाघात आ चुका है अगर वे लोग भी इस उपचार को करेंगे तो अगले हार्ट अटैक से बचे रहेंगे। जिससे आप हमेशा स्वास्थ्य और हेल्दी बने रहेंगे।

मूत्राशय संक्रमण

यूरीन इंफ़ेक्शन होने पर 2 बडे चम्मच दालचीनी के पाउडर में 1 बड़ा चम्मच शहद मिलाकर गरम पानी के साथ लेने से इंफेक्शन ख़तम हो जाता है और रोगी को बहुत आराम मिलता है।

कोलेस्ट्रॉल घटाने के लिए

बढ़े हुए कोलेस्ट्रॉल को घटाने के लिए में 2 बड़े चम्मच शहद में 3 छोटे चम्मच दालचीनी पाउडर मिलाकर 2 गिलास गरम पानी के साथ पी जाएँ। इससे कुछ ही धंटों में खून का कोलेस्ट्रॉल लेवल 10 प्रतिशत तक नीचे आ जाता है और रोगी को बहुत आराम मिलता है।

त्वचा रोगों से बचाए

1 चम्मच दालचीनी के पाउडर में 1 चम्मच शहद मिलाकर त्वचा रोग जैसे दाद, खुजली आदि पर लगाएँ और बेहद आराम पाएँ।

मज़बूत प्रतिरक्षा प्रणाली

दालचीनी के पाउडर में शहद मिलाकर उपयोग करने से हमारी प्रतिरक्षा प्रणाली मजबूत होती है और हमे रोग और रोगाणुओं से लड़ने की शक्ति मिलती है।

पेट के रोग में लाभप्रद

दालचीनी के पाउडर में शहद मिलाकर लेने से पेट दर्द, गैस और पेट के अल्सर में बहुत राहत मिलती है।

कान दर्द को दूर करें

कान दर्द होने पर दालचीनी के चूर्ण में शहद को मिलाकर सेवन करें, इससे कान दर्द में आराम मिलेगा।

मुहांसे गायब करें

3 बड़े चम्मच शहद में एक छोटा चम्मच दालचीनी पाउडर मिलाकर पेस्ट बनाएं। इस पेस्ट को रात को सोते समय मुहांसों पर लगाएं और सुबह उठकर गुनगुने पानी से धोलें । ऐसा दो हफ़्ते तक करने से मुहांसे समाप्त हो जायेंगें और आपका चेहरा बेदाग और सुंदर नज़र आएगा।

गूलर के फल के औषधीय गुण

हमारे घर के आस पास ऐसे कई पेड़ पौधे होते हैं जिनकी तरफ़ हमारा ध्यान ही नहीं जाता है क्योंकि इनके औषधीय गुणों से हम लोग अंजान होते हैं। इन्हीं वनस्पतियों में एक गूलर भी है जो औषधीय गुणों की खान है और यह ग्रामीण क्षेत्रों में आसानी से मिल जाता है। गूलर को संस्कृत में उदुम्बर व जन्तुफल कहा जाता है। हिंदी में इसे गूलर, काकमाल तथा मराठी में इसे उम्बर तथा औदुम्बर, गुजराती में इसे उम्बरों और कन्नड़ में अति के नाम से जाना जाता है। आयुर्वेद में गूलर की जड़, गूलर के फूल और गूलर के फल का उपयोग कई बीमारियों के इलाज के लिए किया जाता है। गूलर का कच्चा फल कसैला एवं दाहनाशक है। जबकि पका हुआ गूलर रुचिकारक, मीठा, शीतल व कब्ज़ मिटाने वाला है। इसकी जड़ में रक्तस्राव रोकने तथा जलन को शांत करने का गुण है। गूलर के कच्चे फलों की सब्ज़ी बनाई जाती है तथा पके फल खाए जाते हैं।

गूलर के फल से घरेलू उपचार

1.रक्तस्राव: गूलर के पके फल का रस 20 ग्राम की मात्रा में गुड़ या शहद के साथ सेवन करने से रक्तस्राव रुक जाता है।
2. मधुमेह: गूलर के फल को पीसकर पानी के साथ इसका सेवन करने से मधुमेह रोग में लाभ मिलता है। इसके अलावा गूलर के फलों की सब्ज़ी बनाकर सेवन करने से भी मधुमेह रोगी को बहुत लाभ मिलता है।
3.खूनी बवासीर खूनी बवासीर की समस्या होने पर गूलर के फलों को सुखाकर पीस लें। फिर इसमें चीनी मिलाकर सेवन करें। इससे खूनी बवासीर जड़ से ख़तम हो जाता है।
4.निमोनिया निमोनिया हो जाने पर गूलर के फल को पानी में मिलाकर काढ़ा बनाएं और इस काढ़े को निमोनिया रोगी को पिलाएँ। इस काढ़े के सेवन से निमोनिया रोगी को बेहद राहत मिलती है।
5.स्त्रियों की मासिक धर्म संबंधित समस्या स्त्रियों में मासिक धर्म के दौरान अधिक रक्तस्राव होने पर गूलर के पके हुए फलों के रस में शहद मिलाकर सेवन कराने से अत्यधिक बहाव रुक जाता है।

गूलर के पत्ते के कुछ घरेलू उपचार:

1. दांतों की समस्या में मुँह में छाले होने पर व मसूढ़ों से खून आने पर गूलर की छाल या पत्तों का काढ़ा बनाकर कुल्ला करने से विशेष लाभ होता है। साथ ही आपके मसूढ़े और दांत भी स्वस्थ रहते हैं।
2. नेत्र रोग आंखें लाल होना, आंखों में पानी आना, जलन होना आदि के उपचार में गूलर बहुत उपयोगी है। इसके लिए गूलर के पत्तों का काढ़ा बनाकर उसे साफ़ और महीन कपड़े से छान लें। ठंडा होने पर इसकी दो−दो बूंद दिन में तीन बार आंखों में डालें। इस उपचार से आँखों की ज्योति भी बढ़ती है।
3.मुंह के छाले मुंह में यदि छाले हो गए हों तो गूलर के पेड़ की पत्तियों को चूसें। ऐसा करने से मुंह के छाले ठीक हो जाएंगे।
4. योनि रोग योनि विकारों में भी गूलर काफ़ी फ़ायदेमंद है। गूलर की छाल का काढ़ा बनाकर योनि को धोने से योनि रोग में फ़ायदा होता है।

गूलर के दूध से घरेलू उपचार:

1. वीर्य में शुक्राणुओं की संख्या बढ़ाने के लिए वीर्य में शुक्राणुओं की संख्या बढ़ाने के लिए 1 छुहारे की गुठली निकालकर उसमें गूलर के दूध की 25 बूंद भरकर रोज़ाना सुबह खाने से ज़बरदस्त लाभ मिलता है।
2. फोड़ा फुंसी के लिए यदि फोड़ा या फुंसी हो तो उस जगह पर गूलर के दूध को लगाने से फोड़ा फुंसी धीरे धीरे ग़ायब हो जाता है।
3. धातुक्षीणता गूलर के दूध को 2 बताशे में डालकर सुबह शाम दूध के साथ सेवन करने से धातुक्षीणता दूर होती है।

सेवन की मात्रा:

– गूलर की छाल का 5 से 10 ग्राम की मात्रा में सेवन करना चाहिए।
– लगभग 2 से 4 गूलर के फलों का सेवन करना चाहिए।
– बड़ों को गूलर के दूध की लगभग सोलह बूदों का ही सेवन करना चाहिए।
– छोटे बच्चों को गूलर के दूध की लगभग पांच बूदें देनी चाहिए।

गुलाब के तेल के फायदे

घावों में फायदेमंद

घाव भरने में गुलाब का तेल बहुत लाभदायक है। गुलाब के तेल में मौजूद एंटीसेप्टिक गुण घावों को भरते हैं और इसकी ख़ुशबू से आपको रिलैक्स महसूस होता है। घाव पर गुलाब के तेल का इस्तेमाल करने से सेप्टिक बनने और इंफ़ेक्शन से

एंटी इंफ़्लैमेटरी

एंटीफ्लॉजिस्टिक बुखार आने से रोकना गुलाब के तेल का अन्य लाभ है। इसमें मौजूद एंटी इंफ़्लैमेटरी तत्व सूजन को कम करने में मदद करते हैं। सूजन वाले भाग पर तेल लगाने से आराम मिलता है।

एस्ट्रिंजेंट

गुलाब के तेल में एस्ट्रिंजेंट के अद्‌भुत गुण होते हैं। यह मसूड़ों और बालों की जड़ों को मजबूत बनाने में मदद करते हैं। स्किन की देखभाल, मांसपेशियों में मजबूती, आँतों और रक्त वाहिकाओं में भी मददगार होते हैं। गुलाब का तेल चोट से निकलने वाले खून को रोकने में भी कारगर होता है।

मेंटल पावर को बढ़ाता

गुलाब के औषधीय गुण दिमागी परेशानियों में भी राहत देते हैं। गुलाब के तेल से दिमाग तेज होता है। गुलाब का तेल डिप्रेशन और स्ट्रेस से लड़ने में मदद करता है। इसलिए इसका प्रयोग करके डिप्रेशन को कम किया जा सकता है। यह मन में सकारात्मक विचार उत्पन्न करता है।

मासिक धर्म की समस्याएं

मासिक धर्म संबंधित रोग, रजोनिवृत्ति और पीरियड्स आने पहले की समस्याओं ले कष्टप्रद लक्षणों को दूर करने के लिए गुलाब का तेल इस्तेमाल करते हैं।

मुलेठी के फ़ायदे और नुकसान

एक गुणकारी औषधि है। यह सेहत के लिए बहुत ही फ़ायदेमंद है। प्राचीन काल से ही मुलेठी का उपयोग कई तरह की बीमारियों को दूर करने के लिए किया जाता रहा है। आयुर्वेद में भी मुलेठी या लिकोरिस (Licorice) या नद्यपानकी सूखी जड़ का उपयोग उपचार के लिए किया जाता रहा है। यह सूजन दूर करने, महिलाओं के सौंदर्य को निखारने, वज़न घटाने में, भूख बढ़ाने में, दांतों की देखभाल करने में और पीरियड्स से जुड़ी समस्याओं को दूर करने में बहुत मदद करती है।मुलेठी के फ़ायदे

शारीरिक कमज़ोरी दूर करे

– 6 ग्राम मुलेठी के चूर्ण को 30 ग्राम दूध के साथ मिलाकर सेवन करें। इससे कुछ ही दिनों में ज़बरदस्त असर नज़र आएगा।

भूख बढ़ाने के लिए

– कुछ लोग ऐसे होते हैं जिन्हें बहुत कम भूख लगती है। अगर आप भी भूख न लगने की समस्या से परेशान है तो मुलेठी का छोटा टुकड़ा कुछ देर के लिए चूसें। इस उपाय को दिन में 3 बार करने से भूख न लगने की समस्या धीरे धीरे दूर हो जाती है।

सर्दी, खांसी व ज़ुकाम को दूर करें

– सर्दी के मौसम में अक्सर लोग सर्दी, खांसी व ज़ुकाम से पीड़ित रहते हैं। इससे बचने के लिए थोड़े से शहद में मुलेठी का चूर्ण आधा चम्मच मिलाकर सेवन करने से भी बहुत आराम मिलती है। गले की खराश दूर करने के लिए – यदि गले में ख़राश की समस्या हो तो मुलेठी कैंडीज़ को चूसें, फ़ायदा मिलेगा। इसको चूसने से गले की ख़राश ठीक होती है।

मासिक संबंधी रोग में

– जिन महिलाओं को मासिक धर्म में बहुत अधिक दर्द होता हो या फिर मासिक धर्म समय से पहले या बाद में आता हो तो इस परेशानी से बचने के लिए 1 महीने तक आधा चम्मच लिकोरिस पाउडर शहद में मिलाकर चाटने से इस समस्या से निजात मिलेगा।

फोड़े, फुंसी व सूजन दूर करें

– शरीर के किसी भी भाग में फोड़े, फुंसी व सूजन हो तो इसे दूर करने के लिए फोड़े, फुंसी व सूजन की जगह पर मुलेठी के चूर्ण का लेप लगाए। इससे बहुत आराम मिलेगा।

एंटीऑक्सीडेंट गुणों से युक्त

– यह एंटीऑक्सीडेंट गुणों से युक्त है इसीलिए इसके सेवन से आपका शरीर वायरस, बैक्टीरिया और बुरे संक्रमण से बचा रहता है। मुलेठी की चाय पीने से शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ती है जिससे आप रोगों से बचे रहते हैं।

पोषक तत्व

– मुलेठी में विटामिन बी, विटामिन ई, फॉस्फोरस, कैल्शियम, आयरन, मैग्नीशियम, पोटेशियम, सेलेनियम, सिलिकॉन और ज़िंक जैसे कई सारे पोषक तत्व पाए जाते हैं।

वज़न घटाने के लिए

– मोटापा एक गंभीर समस्या है और अगर इस पर पहले से ध्यान न दिया जाए तो यह कई अन्य बीमारियों का कारण बन जाता है। ऐसे में आप मोटापे को कम करने के लिए मुलेठी का तेल उपयोग करें। इस तेल से मालिश करें। यह वज़न घटाने में मदद करता है।

दांतों की देखभाल के लिए

– दांतों की उचित देखभाल के लिए आप मुलेठी की जड़ के पाउडर का उपयोग ब्रश करने के लिए करें। इसके अलावा आप इसकी एक नरम छड़ी का उपयोग दातून की तरह उपयोग कर सकते हैं। इससे आपके दांत मजबूत व चमकदार बनते हैं। मुलेठी का परहेज किन्हें करना छाहिये

आवश्यकता से अधिक मात्रा में इसका सेवन करना सेहत के लिए हानिकारक है।

– अगर आप मधुमेह व गुर्दे की बीमारी से परेशान है तो इसका सेवन न करें।
– गर्भवती महिलाओं को इसका सेवन नहीं करना चाहिए।

गुलाब के फल के फायदे

गुलाब का फल

गुलाब के फूल ही नहीं फल भी जड़ी बूटी हैं। गुलाब के फल विटामिन ए, बी 3, सी, डी और ई से भरपूर होते हैं। इसमें मौजूद विटामिन सी के कारण डायरिया के इलाज के लिए इसका इस्तेमाल किया जाता है। गुलाब के फल में फ्लवोनोइड्स, बायोफ्लवोनोइड्स, सिट्रिक एसिड, फ्रुक्टोज, मैलिक एसिड, टैनिन और जिंक भी होता है।
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नीम के तेल के फ़ायदे

नीम एक गुणकारी व प्राकृतिक औषधि है| जिसकी पत्ती, तना, छाल व बीज का उपयोग कई बीमारियों से बचने के लिए किया जाता है। यह बहुत लाभदायक है इसीलिए आज नीम व नीम के तेल का उपयोग साबुन और शैम्पू बनाने में भी किया जाता हैं। इस लेख में आप नीम के तेल के फ़ायदे और नीम का तेल बनाने की विधि बताने जा रहे हैं। नीम में एंटी बैक्टीरियल, एंटी फंगल गुण मौजूद हैं जो हमें संक्रमण से बचाकर हमारी प्रतिरक्षा प्रणाली को भी काफ़ी मज़बूत बनाते हैं। इसके अलावा नीम के बीजों से नीम का तेल निकाला जाता है। जो हल्के भूरे रंग का और सल्फर की तरह गंध वाला होता है। … नीम के तेल के फ़ायदे

1. मलेरिया बुखार

मलेरिया बुखार हो जाने पर नीम के तेल में नारियल या सरसो का तेल मिलाकर शरीर पर मालिश करें। इससे मलेरिया का ज्वर उतर जाता है।

2. फंगल इंफेक्शन से मिटाए

फंगल इंफेक्शन बैक्टीरिया या जीवाणुओं के कारण होता है। अतः अपनी त्वचा को फंगल इंफेक्शन से बचाने के लिए नीम के तेल का उपयोग करें। इसके लिए त्वचा के प्रभावित भाग पर नीम का तेल लगाकर फंगल इंफेक्शन से बचाएँ।

3. मुहांसे गायब करे

अक्सर लड़कियां अपने मुहांसों को लेकर बहुत परेशान रहती हैं। इन मुहांसों को गायब करने के लिए नीम के तेल का उपयोग एक अच्छा उपाय है। बस नीम के तेल को उंगली से मुहांसों पर कुछ दिन तक लगाकर मुहांसों को दूर भगाएँ।

4. जुओं को दूर भगाए

सिर को जुओं के प्रभाव से मुक्त रखने के लिए नीम के तेल का उपयोग एक अच्छा उपाय है। नीम के तेल को बालों की जड़ों में लगाकर जुओं को दूर भगाएँ।

5. बालों की देखभाल के लिए

बालों की देखभाल के लिए नीम का तेल बेस्ट है। यह बालों के लिए अच्छे कंडीशनर के रूप में काम करता है। यदि आपके बाल घुंघराले है तो स्नान करने से पहले अपने बालों में नीम का तेल लगाएँ। इससे आपके बाल सीधे और चमकदार नज़र आयेंगें।

6. रूसी दूर भगाए

बालों में रूसी हो जाने पर नीम का तेल बालों में 2-3 सप्ताह तक लगाएँ। इसके उपयोग से बालों की रूसी दूर हो जाएगी। साथ ही बालों की जड़ें मजबूत होती है।

7. रूखे बालों को मुलायम बनाए

अगर आपके बाल रूखे सूखे और बेजान हैं तो एक बार अपने बालों की नीम के तेल से मसाज ज़रूर करें। इससे आपके रूखे और क्षतिग्रस्त बालों की मरम्मत हो जाएगी। आपके बाल मुलायम और चमकदार बन जाएंगे।

8. मच्छरों से बचाएँ

मच्छरों के काटने से बचने के लिए नीम के तेल में कपूर को मिलाकर शरीर पर लगाकर सो जाएँ। इस उपयोग से आप मच्छरों के काटने से बचे रहते हैं।

9. त्वचा संबंधित रोगों का इलाज

नीम के तेल का उपयोग एक्जिमा, दाद, सोरायसिस, फोड़े फुंसी, दाने आदि में लगाने पर इन सभी समस्याओं से छुटकारा मिल जाता है।

10. कान का दर्द खत्म करे

कान दर्द होने पर या कान के बहने पर कुछ बूंदें नीम का तेल कुछ दिनों तक कान में डालने से फायदा मिलता है।

नीम का तेल बनाने की विधि

आइए हम आपको बताते हैं कि घर पर नीम का तेल कैसे बनायें… ● नीम का तेल बनाने के लिए नीम के पेड़ से पके हुए फल तोड़ें।
● फलों को धूप में 4 से 5 दिन तक सुखा लें।
● अच्छे से सूखे हुए नीम के फलों से बीज की गुठलियाँ निकालें।
● गुठलियों को मोटा मोटा तोड़कर ग्राइंडर में पीस लें।
● ग्राइंडर में नीम की गुठलियों का पेस्ट बन जाएगा।
● इस पेस्ट अच्छे से हाथों से निचोड़कर नीम का तेल निकालें।
● नीम का तेल उपयोग करने से पहले गरम करके ठंडा कर लें।
आधा किलो गुठलियों से लगभग 50 ग्राम तेल प्राप्त हो जाएगा।

गुलाब जल के फायदे

1. हर्बल चाय: –

गुलाब जल का इस्तेमाल हर्बल चाय के रूप में होता है। यह पेट के रोगों और यूरीनल इंफ़ेक्शन को दूर करने के काम आती है। हर्बल गुलाब जल चाय के एक घूंट से आप रिलैक्स फील करेंगे।

2. बालों की देखभाल: –

गुलाब जल का एक और अनजाना लाभ भी है। इससे बालों को भी फायदा होता है। ये बालों की जड़ों में ब्लड सर्कुलेशन में सुधार करता है, जिससे बालों की ग्रोथ में मदद मिलती है। इसके अलावा यह बालों को मजबूत और लचीला बनाने के लिए एक नैचरल कंडीशनर भी है।

3. आँखों की देखभाल:-

गुलाब के फूलों से गुलाब जल बनाया जाता है। ये गुलाब जल थकी हुई आँखों को फौरन राहत पहुंचाने में बहुत कारगर होता है। इससे आँखों में नई चमक आती है और वह हेल्दी रहती हैं। अगर आप कंप्यूटर के सामने बहुत ज्यादा समय बिताते हैं तो सोने से पहले रोज आँखों में गुलाब जल डालना चाहिए। इससे आंखों की थकान चली जाएगी।

4. स्किन केयर: –

गुलाब जल स्किन केयर प्रॉडक्ट के तौर पर काफ़ी फ़ेमस है। गुलाब जल एक बेस्ट टोनर भी है। इसमें नैचरल एस्ट्रिंजेंट होने के कारण ये स्किन को बहुत फायदा करता है। रोज रात को इसे चेहरे पर लगाने से स्किन टाइट होती। यह स्किन के पीएच बैलेंस को बनाए रखता है।

जीरे के फ़ायदे

जीरे का सबसे ज़्यादा उपयोग तड़का लगाने के लिए करते हैं, क्योंकि यह एक सुगन्धित मसाला है। जिससे भोजन को स्वादिष्ट और खुशबूदार बनता है। इसीलिए चाहे तड़के वाली दाल हो, दही बड़ा हो, पकौड़े हो या फिर चटपटी आलू चाट रेसपी हो इन सभी में जीरे का उपयोग ज़रूर किया जाता है। ताकि इन रेसपी में स्वाद और सुगन्ध का उचित तालमेल बना रहे। जीरा केवल सुगन्धित मसाला ही नहीं बल्कि एक गुणकारी औषधि भी है। जीरे के फ़ायदे – याददाश्त बढ़ाने, रूप निखारने, सेक्सुअल हेल्थ, पाचन क्रिया को ठीक रखने में सहायक है। इसके अलावा यह अनिद्रा, एनीमिया और सर्दी ज़ुकाम से भी बचाता है। बस एक बात का हमेशा ध्यान रहे कि जीरे का सेवन सेहत के लिए फ़ायदेमंद है लेकिन अधिक मात्रा में इसका सेवन सेहत को नुकसान भी पहुँचा सकता है।

1. बवासीर का इलाज

आयुर्वेद में जीरे का उपयोग बवासीर जैसी गंभीर समस्‍या के उपचार के लिए किया जाता है। अगर जीरा पाउडर को पानी और शहद में मिलाकर पिए तो इससे बवासीर रोगी को लाभ मिलेगा।

2. सौंदर्य निखारे

जीरे में विटामिन ई और कुछ ऐसे तत्व पाए जाते हैं, जो आपकी त्वचा पर पड़ने वाले दाग-धब्बों को हल्का कर त्वचा को बेदाग बनाते हैं।

3. मोटापा घटाए

जीरे के सेवन से मोटापा तेज़ी से घटता है। इसके लिए आप एक गिलास पानी में 3 ग्राम जीरा पाउडर और 1/2 शहद मिलाकर पिएँ इससे आपको लाभ मिलेगा। इसके अलावा बेहतर परिणाम के लिए आप नियमित मात्रा में जीरे को सलाद या सूप में भी डालकर सेवन कर सकते हैं।

4. अनिद्रा भगाए

जीरे में पाया जाने वाला मेलाटोनिन अनिद्रा की समस्या को दूर करता है। इसीलिए जब भी केला खाएँ तो उस पर थोड़ा जीरा पाउडर छिड़क कर खाएँ। इससे अनिद्रा दूर होती है और अच्‍छी नींद भी आती है।

5. शुक्राणुओं की संख्या बढ़ाए

जीरे में भरपूर मात्रा में जिंक पाया जाता है जो स्‍पर्म की संख्या को बढ़ता है। इसीलिए एक सीमित मात्रा में खाने में जीरे का उपयोग ज़रूर करें।

6. एनीमिया का इलाज

जीरा आयरन का एक अच्छा स्रोत है जो हीमोग्लोबिन के निर्माण में सहायक है। इसीलिए एनीमिया से पीड़ित रोगी को नियमित रूप से जीरे के सेवन की सलाह दी जाती है।

7. याददाश्त बढ़ाए

जीरे में मिनरल्‍स, जिक्‍सैनथिन, विटामिन बी6, नियासिन और राइबोफ्लेविन नामक तत्‍व पाए जाते हैं, जो याददाश्‍त को बढ़ाने में सहायक है। इसीलिए मेमरी तेज करने के लिए भुना हुआ जीरा ज़रूर चबाएं।

8. पाचन क्रिया में सुधार

जीरे में मौजूद कुछ आवश्‍यक तत्व लार ग्रंथियों को बेहतर कर भोजन पचाने में मदद करते हैं। इसीलिए दाल में जीरे का तड़का लगाकर या सब्‍जी में पाउडर छिड़ककर खाए या जीरे को पानी में उबालकर दिन में तीन बार पीने से भी फ़ायदा होगा।

9. सर्दी ज़ुकाम मिटाए

जीरे में एंटी-इनफ्लैमटरी, एंटी-बैक्टीरियल और एंटी-फंगल जैसे गुण मौजूद है जो शरीर को रोगों से लड़ने की शक्ति प्रदान कर इम्‍यूनिटी पावर को मजबूत बनाता है और आपको छोटी मोटी बीमारियों जैसे सर्दी ज़ुकाम से भी बचाता है। जीरे के फ़ायदे उठाने के लिए इसे पानी में उबालकर पीने से भी लाभ प्राप्त होता है।

जीरे के नुकसान

जीरे के फ़ायदे बहुत हैं, लेकिन इसका अधिक मात्रा में सेवन करने से कुछ नुकसान भी है…
1. गर्भवती महिलाअत्यधिक जीरा का सेवन न करें क्योंकि यह गर्भपात या मिसकैरेज का कारण बन सकता है।
2. अधिक मात्रा में जीरे के सेवन से लीवर या किडनी को नुकसान पहुँच सकता है।
3. जो लोग एलर्जी रोग से परेशान हैं, वे लोग जीरा का सेवन कम मात्रा में करें क्योंकि अधिक मात्रा में जीरा का सेवन त्वचा में एलर्जी पैदा कर सकता है।
4. स्‍तनपान कराने वाली महिलाए जीरे के अत्‍यधिक मात्रा में सेवन से बचें क्‍योंकि अधिक मात्रा में सेवन करने से उनके शरीर में दूध का उत्‍पादन कम होने लगता है।
5. पीरियड्स / मासिक धर्म के दौरान जीरे के अधिक मात्रा में सेवन से हैवी ब्‍लीडिंग हो सकती है। इसीलिए पीरियड्स के दिनों में हैवी ब्‍लीडिंग से बचने के लिए जीरे का सेवन सीमित मात्रा में ही करें।

नीलगिरी तेल के फायदे और नुकसान

नीलगिरी या सफेदा जिसे अंग्रेजी में यूकेलिप्‍टस (Eucalyptus) कहते है। यूकेलिप्टस वैज्ञानिक गुणों के कारण फीवर ट्री, ब्लू गम ट्री, स्ट्रिंगी बर्क ट्री आदि के नाम से भी जाना जाता है। नीलगिरी एक सदाबहार वृक्ष है। जिसके ताज़े पत्तों को भाप से पकाकर और आसवन की प्रक्रिया को अपनाकर यूकेलिप्टस का तेल प्राप्त किया जाता है। यह तेल बहुत सुगंधित और रोगाणुनाशक होता है। इस तेल का उपयोग औषधीय उपचार और एरोमाथेरेपी के लिए भी किया जाता है। नीलगिरी में मौजूद यौगिक के कारण इसका उपयोग कुछ दवाइयों जैसे बाम, इनहेलर, मरहम, रैश क्रीम और माउथवॉश आदि में भी किया जाने लगा है। यूकेलिप्‍टस के तेल के उपयोग से शरीर में खून का संचार अच्छे से होता है। यह सर्दी, ज़ुखाम, खांसी, थकान व त्वचा रोग में राहत प्रदान करता है।

नीलगिरी तेल के फायदे:-

1 ज़ुखाम दूर करने के लिए

भगोने गर्म पानी में इस तेल की 3 बूंद डालकर भाप लीजिए। इससे ज़ुखाम ठीक हो जाता है।

2.जूँ को मारे

नीलगिरी तेल में बैक्टीरिया और कीटाणुओ का नाश करने की शक्ति मौजूद है इसलिए जूँ को मारने के लिए थोड़े से नारियल तेल में कुछ बूंद नीलगिरी का तेल मिलाकर बालों में लगाएँ। फिर कुछ घण्टे बाद शैम्पू कर लीजिए। इस घरेलू नुस्खे से जुएं मर जाएंगे।

3.रूम फ्रेशनर के रूप में

नीलगिरी तेल में दुर्गन्ध नाशक, रोगाणु नाशक और एंटीसेप्टिक गुण होने के कारण आप इसका उपयोग कमरे को महकाने में कर सकते हैं। एक छोटी शीशी में 1 चम्मच सोडा और कुछ बूंद नीलगिरी तेल की डालकर शीशी का मुँह किसी कागज से बंद कर दे और इस कागज में सुई से 8 से 10 छेद कर दीजिए। अब आप इस रूम फ्रेशनर शीशी को कमरे के किसी भी कोने में रख दीजिए। इससे घर का हर कोना महकेगा।

4. बालों के लिए

मजबूत व सिल्की बालों के लिए 2 चम्मच नीलगिरी तेल में 2 चम्मच बादाम का तेल मिलाकर गर्म करे। जब यह मिश्रण हल्का गुनगुना रह जाए तब इस तेल से बालों की मसाज करें। इससे बाल मजबूत बनेंगे।

5. शारीरिक दर्द दूर करे

जिन लोगों के शरीर में दर्द या फिर अक्सर जोड़ों में दर्द बना रहता हो वे लोग कुछ बूंद यूकेलिप्टस के तेल से मालिश करें और हल्के गुनगुने पानी में नीलगिरी तेल की कुछ बूंदों को डालकर नहाए। इससे भी दर्द में आराम मिलता है।

6. त्वचा रोग के लिए

त्वचा पर किसी भी प्रकार के संक्रमण जैसे दाद व खुजली आदि की समस्या को दूर करने के लिए थोड़े से सेब साइडर सिरका में थोड़ा यूकेलिप्टस का तेल मिलाकर प्रभावित क्षेत्रों पर लगाए। इससे जल्दी ही राहत मिलती है।

7. बुख़ार में

नीलगिरी तेल बुखार को ठीक करने और शरीर के तापक्रम को कम करने में सक्षम है इसीलिए नीलगिरी तेल से शरीर की मालिश करें इससे शरीर का तापक्रम भी कम होगा और बुख़ार से भी राहत मिलेगी। यूकेलिप्टस के इसी गुण के कारण इस फीवर आयल के नाम से भी जानते हैं।

8. शेविंग के बाद

शेविंग करने के बाद त्वचा को किसी भी प्रकार के संक्रमण से बचाने के लिए कुछ बूंद नीलगिरी तेल से मसाज करें। इससे आप संक्रमण नहीं होगा और आपकी त्वचा भी मुलायम रहेगी।

9. जल जाने पर

शरीर के किसी भी भाग के जल जाने पर उस जगह नीलगिरी का तेल लगाए। इससे आपको आराम भी मिलेगी और आप संक्रमण से भी बचे रहेंगे।

10.अस्थमा या दमा रोग में

युकेलीप्टस के तेल की कुछ बूंद को सूंघकर या छाती पर मलकर भी आप अस्थमा या दमा रोग में आराम प्राप्त कर सकते हैं।

11. गले की खराश दूर करने के लिए

हल्के गुनगुने पानी में कुछ बूंद नीलगिरी तेल मिला लें और फिर इस पानी से कुल्ला करें। इस उपचार से गले की खराश दूर हो जाती है।

12. बंद नाक के लिए

नाक में कफ जमने से साँस लेने में तकलीफ होती है। इस तकलीफ से राहत पाने के लिए यूकेलिप्टस तेल की कुछ बूंदों को सूंघे। यह बंद नाक को खोलने और आप को अच्छा महसूस कराने में मदद करेगा।

नीलगिरी तेल के नुकसान

नीलगिरी तेल का अधिक मात्रा में सेवन शरीर को नुकसान पहुँचा सकता है इसीलिए इसका अधिक सेवन न करें।

बबूल के फायदे

बबूल जिसे कीकर के नाम से भी जाना जाता है। यह एक कांटेदार पेड़ है जिसकी पत्‍ती, टहनी, गोंद और छाल सभी औषधीय रूप में उपयोग किया जाता है। हमारे भारत में दो तरह के बबूल पाए जाते हैं। एक देशी बबूल दूसरा मासकीट बबूल है। बबूल की लकड़ी बहुत मजबूत होती है। इससे बने फर्नीचर बहुत मजबूत होते हैं और इसमें घुन भी नहीं लगता है। बबूल का गोंद, छाल, पत्ती और जड़ का सेवन कफ, खांसी, पेट दर्द, दांतों की सड़न और वीर्य की कमी को दूर कर उत्तम स्वास्थ्य प्रदान करता है। आज हम भी आपको बबूल की पत्ती, जड़ या छाल के सेवन से होने वाले फायदों के बारे में बताने जा रहे हैं। आइए बबूल के फायदे जानते हैं।

1. दांत के कीड़े

रोज़ाना बबूल की छाल से काढ़ा बनाकर 3 से 4 बार कुल्ला करें। इससे मसूड़ों की सड़न और खून आना बंद हो जाता है और दांत के कीड़े भी नष्ट हो जाते हैं।

2. खांसी

बबूल की मुलायम पत्‍तियों को पानी में उबाल कर रख लें। फिर हल्के गुनगुने पानी को दिन में 2 से 3 बार पिएं। इससे खांसी ठीक हो जाएगी।

3. मजबूत दांत

बबूल के पेड़ की मुलायम टहनियों का दातून करें। इससे दांत स्वस्थ्य और मज़बूत बनेंगे। इसके अलावा 70 ग्राम बबूल का कोयला, 30 ग्राम भुनी हुई फिटकिरी और 15 ग्राम काला नमक मिक्‍स कर के मंजन बनाएं। रोज़ाना इस मिश्रण से मंजन कर दांतों को मज़बूत बनाएं। जानिए दांतों से कैविटी कैसे हटाये।

4. चोट लगने, घाव होने या जलने पर

बबूल की ताज़ी पत्‍तियों को पीस कर घाव या चोट पर लगाए या जले हुए भाग पर लगाएं। इस उपचार से घाव या चोट जल्दी भर जाता है।

5. मुंह के छाले

बबूल की छाल सुखाकर पीसकर बारीक़ चूर्ण बना लें। फिर आधा गिलास पानी में 1 चम्मच चूर्ण डालकर उबाल लें। अब इस पानी से दिन में 2-3 बार कुल्ला करे। इससे मुंह के छाले दूर हो जाते हैं।

6. वीर्य की कमी

कुछ बबूल के पत्तों को धीरे धीरे चबाकर उसके ऊपर से गाय का दूध पिएं। इससे कुछ ही दिनों में वीर्य की कमी दूर होती है। इसके अलावा बबूल की कच्ची फली को सुखा लें और फिर मिश्री मिलाकर खायें, इससे वीर्य रोग में फ़ायदा मिलेगा।

7. टूटी हुई हड्डी

10 ग्राम बबूल की जड़ को सुखाकर चूर्ण बनाकर इसमें शहद और बकरी का दूध मिलाकर पीने से तीन दिन में ही टूटी हुई हड्डी जुड़ जाती है।

8. मधुमेह रोग

बबूल की कुछ कोमल पत्तियों में 5 कालीमिर्च और थोड़ा पानी मिलाकर बारीक़ पीस लें और फिर इसे छानकर सुबह शाम पिए। इससे मधुमेह रोग में लाभ होता है।

9. गले की सूजन

बबूल की छाल को पानी में डालकर उबालकर इस पानी से गरारे करने से गले की सूजन दूर हो जाती है।

10. कमर में दर्द

बबूल का गोंद, छाल और फली को बराबर मात्रा में मिलाकर सुखाकर बारीक़ पीस लें। फिर इस चूर्ण का एक चम्मच दिन में 3 बार सेवन करे। इससे कमर दर्द में आराम मिलता है।

11. टॉन्‍सिल

बबूल की छाल का गरम काढ़ा बनाकर उसमें स्वादानुसार काला नमक मिला कर गरारा करें। इससे टॉन्सिल तुरंत ठीक हो जाएगा।

12. पेट दर्द

बबूल की ताज़ी छाल को पीसकर रस निकाल लें। फिर इस रस में दही मिलाकर पिएं। इससे पेट का दर्द कम हो जाएगा।

गुलाब के औषधीय गुण

गुलाब के फूल सबको सुंदर और आकर्षक लगते हैं। लेकिन इनका इस्तेमाल सिर्फ़ सजावट तक ही सीमित नहीं है। गुलाब एक अच्छी जड़ी-बूटी भी है। गुलाब के फूल, गुलाब के फल, गुलाब जल और गुलाब के तेल से कई तरह की बीमारियों में आराम मिलता है। उदाहरण के लिए गुलाब का तेल चोट लगने पर ख़ून को रोकने में कारगर है। आज हम आपको गुलाब के औषधीय गुण और उपयोग बताने वाले हैं, जिनसे आपको बहुत लाभ होगा। गुलाब के फूल के फायदे

1. पायरिया

गुलाब का फूल चबाने से मसूढ़े मजबूत होते हैं। मसूढ़ों से खून और मवाद आना बंद हो जाता है। मुंह की बदबू भी चली जाती है। इस तरह पायरिया का उपचार होता है।

2. पेट के रोग

गुलाब के औषधीय गुण पेट के विकार मिटाते हैं। गुलाब के फूल का रस, सौंफ का रस और पुदीने का रस मिलाकर रख लें। इसकी 4 बूंद पानी में मिलाकर पीने से पेट के रोग समाप्त होते हैं। भोजन करने के बाद 2 चम्मच गुलकंद 2 बार खाएं, पेट के रोग से बचे रहेंगे।

3. होंठों का कालापन

गुलाब की कुछ पंखुड़ियां पीसकर समान मात्रा में मलाई मिलाकर होंठों पर नियमित लगाना चाहिए। इससे होंठों का कालापन दूर होता है।

4. शीतपित्त

गुलाब के फूल का रस और चंदन का तेल बराबर मात्रा में मिलाकर शीतपित्त पर लगाने से लाभ होता है। इसके अलावा आप 25 ग्राम गुलाब जल में 25 ग्राम सिरका मिलाकर शरीर की मालिश करें, शीतपित्त ठीक हो जाएगी।

5. सिर दर्द

10 ग्राम गुलाब की पंखुड़ियां 2 इलायची के साथ चबाने से सिर का दर्द ठीक हो जाता है।

6. यौनशक्ति वर्धक

गुलाब के औषधीय गुण यौन शक्ति के लिए भी लाभदायक हैं। गुलाब की कलियां चबाकर खाने से यौन शक्ति बढ़ती है।

7 . मुंह के छाले

गुलाब के फूल की पंखुड़ियां चबाने या उन्हें उबालकर बनाए गए काढ़े से गरारा करने से मुंह के छाले ठीक होते हैं।
रात भर पानी में सूखे गुलाब को पानी में भिगो कर रखें। सुबह से मसलकर पानी छान लें। इसमें 2 चम्मच चीनी मिलाकर पिएं। इससे पेट की गर्मी दूर हो जाएगी। जिससे छाले स्वत: समाप्त हो जाएंगे। 8. कब्ज़ गुलाब का रस पीने सए कब्ज़ दूर हो जाती है। यह आंतों में जमे हुए मल को बाहर निकाल देता है।

बबूल के गोंद के फायदे

बबूल या नीम के तने में कहीं पर भी काट देने या चीरा लगाने से जो पदार्थ निकलता है और सूखने पर यह भूरे रंग का कड़ा पदार्थ बन जाता है उसे गोंद कहते है। यह शीतल, पौष्टिक और औषधीय गुणों से परिपूर्ण होता है इसीलिए इसका उपयोग कई दवाइयों को बनाने में भी किया जाता है। इसके अलावा गोंद से मिठाई भी तैयार की जाती है जो हेल्दी और पौष्टिक होती है। गोंद में कैल्शियम, मैग्नीशियम, पोटैशियम, चीनी और नमी पाई जाती है। बबूल के गोंद को अंग्रेज़ी में Acacia Gum कहते हैं। आज हम भी आपको बबूल के गोंद के फायदे बताने जा रहे हैं… कीकर या बबूल का गोंद पौष्टिक होता है। इसकी तासीर ठंडी होती है इसीलिए यह खांसी, लिकोरिया, पेचिश, मूत्राघात, मूत्रकृच्छ आदि में बहुत उपयोगी है। यह सीने के दर्द को समाप्त करता है। इसका सेवन हड्डियों, आंतो और अमाशय को मज़बूत बनाता है। यह जलन को दूर करने वाला, घाव को भरने वाला, रक्त का शोधन करने वाला है।

मासिक धर्म :

मासिक धर्म की पीड़ा या दर्द से परेशान महिलाएं 150 ग्राम बबूल का गोंद कढ़ाही में भूनकर पीसकर बारीक़ चूर्ण बना लें। फिर रोज़ाना 15 दिन तक 10 ग्राम की मात्रा में गोंद के चूर्ण को मिश्री के साथ सेवन करें। इससे मासिक धर्म का दर्दकम हो जाता है और मासिक धर्म नियमित रूप से और समय से आने लगता है।

मुंह के छाले:

मुंह में छाले होने पर थोड़ा गोंद का टुकड़ा मुंह में डालकर चूसें। इससे मुंह के छाले दूर हो जाते हैं।

मधुमेह रोग:

रोज़ाना दिन में 3 बार 4 ग्राम बबूल के गोंद का चूर्ण पानी के साथ या गाय के दूध के साथ सेवन करने से मधुमेह रोग में लाभ मिलता है।

जले हुए भाग पर :

थोड़े से बबूल के गोंद को पानी में घोल लीजिए। फिर इसे शरीर के जले हुए भाग पर लगाएं। इससे जले हुए भाग की जलन कम हो जाती है।

खांसी:

थोड़ा बबूल का गोंद मुंह में रखकर धीरे धीरे चूसने से खांसी ठीक हो जाती है।

आमाशय का घाव :

बबूल या कीकर का गोंद पानी में घोलकर पीने से आमाशय और आंतों का घाव ठीक हो जाता है। साथ ही इसके सेवन से अमाशय और आंत भी मज़बूत होती है।

प्रसव से हुई कमज़ोरी :

महिलाओं के लिए गोंद का सेवन बहुत ही फ़ायदेमंद है। यह बच्चा जन्म देने वाली माँ को बच्चा पैदा होने के बादशारीरिक कमज़ोरी को दूर करने के लिए खिलाया जाता है।

लू से बचाव:

गर्मियों के मौसम में थोड़े से गोंद को पानी में घोलकर पिएं तो आप लू से बचे रहेंगे।

मूत्र रोग:

पेशाब में जलन होना या पेशाब रुक रुक कर आने में गोंद का नियमित रूप से सेवन बहुत फ़ायदेमंद साबित होता है।

वीर्य की कमी:

पुरुषों के लिए बबूल का गोंद बहुत ही फ़ायदेमंद है, इसके सेवन से वीर्य की कमी की समस्या दूर होती है और पौरुष बढ़ता है। बबूल के गोंद या कीकर के गोंद के सेवन से चुस्ती, फुर्ती और ताज़गी भी बनी रहती है।

बेल के पत्ते के फायदे और उपयोग

आयुर्वेद में बेल के फल की तरह बेल के पत्ते का उपयोग कई दवाइयों को बनाने में किया जाता है। बेल का पत्ता अपच, गैस की समस्या, नपुंसकता, दमा रोग, एसिडिटी, कृमि नाशक, ज्वर, त्रिदोष (वात, पित और कफ) विकार आदि को दूर करने वाला तथा आपको एक हेल्दी लाइफ प्रदान करने वाला है। इसीलिए आज हम भी आपको बेल के पत्ते के फायदे बताने जा रहे हैंज्वर: जब कभी आपको बुखार या ज्वर आ जाए तो बेल की पत्तियों को 1 से 2 गिलास पानी में अच्छे से पकाकर काढ़ा बना लें और फिर इस काढ़े को पी जाएं। ऐसा करने से आपका बुखार ठीक हो जाएगा।

हार्ट प्रॉब्लम:

बेल के पत्तों का काढ़ा बनाकर रोजाना पीने से आपका हृदय हमेशा मजबूत रहेगा औरहार्ट अटैक का खतरा भी कम रहेगा।

मुँह में छाले :

जब कभी मुंह में छालेहो जाएं, तो बेल की पत्तियों को मुंह में रखकर चबाते रहें। इससे छाले धीरे धीरे समाप्त हो जाएंगे।

अपच की समस्या:

अपच की समस्या होने पर थोड़े से बेल के पत्ते, थोड़ा सेंधा नमक व थोड़ा कालीमिर्च पीसकर कुछ दिनों तक सेवन करें। इससे अपच की समस्या दूर होती है।

मधुमेह रोग :

20 बेल के पत्ते, 20 नीम के पत्ते व 10 तुलसी के पत्तों को एक साथ पीसकर छोटी छोटी गोली बनाकर सुखा लें। अब रोज सुबह एक गोली का सेवन करें। इससेमधुमेह रोगमें बेहद लाभ मिलता है

संधिवात या गुठनों का दर्द :

संधिवात या गुठनों का दर्द होने पर बेल के पत्ते गर्म करके दर्द वाली जगह बाँधने से सूजन व दर्द में राहत मिलती है।

कमजोरी :

बेल के पत्तियों की चाय बनाकर इसमें थोड़ा जीरा पाउडर और दूध मिलाएं, इसे पीने से शारीरिक कमजोरी दूर होती है।

नपुंसकता का इलाज :

यौन विकार को दूर करने के लिए बेल के पत्ते के रस में थोड़ा शहद मिलाकर लिंग पर 40 दिनों तक लेप करें। इससे नपुंसकता समाप्त होती है।

गैस की समस्या :

पेट में गैस की समस्याहोने पर थोड़े से बेल के पत्ते व हरसिंगार के पत्तों को 1 गिलास पानी में उबाल लें। फिर इसमें स्वादानुसार थोड़ा काला नमक मिलाकर पी जाएं। इससे गैस की समस्या दूर हो जाती है।

शारीरिक दुर्गंध:

बेल के पत्तों को पानी में डालकर स्नान करने से शारीरिक दुर्गंध नहीं आती है। इस बेल के पत्ते के फायदे से आपके डियोड्रेंट का खर्चा बच जाएगा।

सर्दी, खांसी व जुकाम :

अक्सर लोग बरसात के मौसम में सर्दी, खांसी, ज़ुखाम और बुखार से परेशान रहते हैं। ऐसे में 2 चम्मच बेल के पत्तियों के रस में थोड़ा शहद मिलाकर सेवन करने सेसर्दी, खांसी व जुकाम से राहतमिलता है।

दमा रोग:

दमा या अस्थमा रोगी के लिए बेल के पत्तों का काढ़ा लाभकारी है।

एसीडिटी:

एसिडिटी होने पर बेल के पत्तियों के रस में थोड़ी मिश्री मिलाकर पिएं। इससे एसिडिटी में आराम मिलता है।

पेट के कीड़े :

पेट के कीड़ों को नष्टकरने के लिए कुछ दिनों तक बेल के पत्तियों का रस पिएं।

पेट की जलन :

50 ग्राम बेल के पत्तों के रस में 5 ग्राम सेंधा नमक और 5 ग्राम कालीमिर्च चूर्ण मिलाकर सेवन करने से पेट की जलन शांत हो जाती है।

आँखों का मोतियाबिंद:

बेल के पत्ते में थोड़ा देशी घी लगाकर सेक लें। फिर इसे ठंडा करके आँखों पर रखें। इस उपचार से आँखों का मोतियाबिंद व आँखों के अन्य रोग ठीक हो जाता है।आंखों की थकान दूर करने के उपायजानिए।

पीलिया:

बेल के पत्तों के रस में एक चुटकी कालीमिर्च चूर्ण मिलाकर पीने से पीलिया रोग धीरे धीरे ठीक होने लगता है।

उल्टी:

बेल के पत्तों को थोड़े से सोंठ और 1 गिलास पानी के साथ पकाकर काढ़ा बनाकर पीने से उल्टी बंद हो जाती है।

नकसीर:

बेल के पत्ते के रस को पानी में मिलाकर पीने से नकसीर ठीक हो जाता है।

कोलेस्ट्रॉल:

बेल की ताजा पत्तियों को कूटकर रस निकाल कर रोज सुबह पीने से कोलेस्ट्रॉल कंट्रोल रहता है।

इस प्रकार आपने बेल के पत्ते के फायदे जानें, इस जानकारी को आप कभी भी आवश्यकता होने पर उपयोग कर पाएंगे।

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